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अक्षय तृतीया व्रत कैसे करें?

वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की‍ तृतीया को ही अक्षय तृतीया कहते हैं। यदि तृतीया मध्याह्न से पहले शुरू होकर प्रदोष काल तक रहे तो श्रेष्ठ मानी जाती है। इस दिन जो भी शुभ कार्य किए जाते हैं, उनका बड़ा ही श्रेष्ठ फल मिलता है। इस दिन अधिकाधिक दान देने का बड़ा माहात्म्य है। 

इसी दिन से सतयुग का आरंभ होता है इसलिए इसे युगादि तृतीया भी कहा जाता हैं। इस दिन जप, तप, ज्ञान तथा दान अक्षय फल देने वाला होता है। यह दिन दान-धर्म की दृष्टि से महाफलदायक माना गया है। 

Posted by rahul thakur on 4:25 PM. Filed under , . You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0

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